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Hindi Story (हिंदी स्टोरी official) : प्रेम कहानी (prem kahani)- "तकदीर इश्क़ की" Cute love Stories in Hindi, Really Heart Touching Love Story in Hindi.

 

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प्रेम कहानी (prem kahani)- "तकदीर इश्क़ की" Cute love Stories in Hindi, Really Heart Touching Love Story in Hindi.





जुलाई का महीना था मानसून आ चुकी थी बारिश खुशियां बनके बरस रही थी और गोवा के इन सड़कों पर बारिश के वक्त चलना कितना मुश्किल होता है जानते होंगे। जहां मैं रहता हूं, मेरे मोहल्ले से 2 किलोमीटर पर बिच है जहां ऐसी बारिशों में वहां का नजारा बहुत है दृश्य मई लगता है क्योंकि इसी समय जोड़ियां बनती भी है और टूटती भी। लोग अक्सर भूल जाते हैं की दिल टूटने के बाद जब दिल जवाब देना बंद कर दे फिर आप अकेले पंछी की तरह जिसको किसी ने पिंजरे में कैद कर दिया हो।


अगले दिन मैं अकेले उस बीच के पास गया और वहां लोगों को बारिश में झूमते, नाचते और सब गाते दिख रहे थे सब बहुत खुश है सब बहुत खुश थे और समुंदर भी लहर बन बन के झूम रही थी उसे भी पता था कि यहां पर आशिकों का मेला लगा है जिसमें एक लड़का और एक लड़की दोनों एक दूसरे की आंखों में आंखें डाल के अपनी जिंदगी कह डालते थे, मैं बहुत अकेला था वहां उस भीड़ में लेकिन खुश था की जिंदगी में कुछ खोने के बाद ही तो कुछ अच्छा होता है।


फिर मैं रेस्टोरेंट के अंदर जाकर बैठा फिर मैंने कुछ खाने के लिए आर्डर किया और कोल्ड ड्रिंक्स मंगवाई। मैं वह अकेले बैठा था मेरे सामने वाला टेबल बिल्कुल खाली था। पर छोड़ो यह सब बातें,  कुछ खाते हैं। तूफान की लहर और तेज हो रही थी समुंदर अब झूमने के बजाय तांडव करने लगी थी। वहां से सब लोग धीरे-धीरे कुछ लोग रेस्टोरेंट की तरफ आ रहे थे और कुछ लोग गाड़ी से अपनी मंजिल की तरफ जा रहे थे लेकिन कुछ ज्यादा ही भीड़ थी शायद रेस्टोरेंट के अंदर जो उस दिन उमड़ पड़ी थी। उसी भीड़ ने मुझे मेरे टेबल के दोनों साइड से ब्लॉक कर दिया था मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था कि क्या कर रहे हैं सब, फिर मैं कोल्ड ड्रिंक पीने लगा अचानक उसी भीड़ में मेरे टेबल के सामने गीले कपड़ों में भीगी हुई भागी भागी आकर वहां बैठ गई।


मैं उसकी तरफ देख रहा था उसने जब अपना सर नीचे कर अपने बाल को बिखेरा तो मैं थोड़ा सा स्तब्ध हो गया। जिसकी याद भुलाई नहीं जाती उसको याद करने के सौ बहाने मिल जाते हैं शायद मेरी जिंदगी में ऐसा ही कुछ हो रहा था। मैंने शॉल उसकी तरफ बढ़ाया उसने मेरी आंखों में देखा और उस शॉल को लिया । तभी जिस रेस्टोरेंट में हम बैठे थे वहां एक सिंगर बहुत ही सुंदर गाना गा रहा था। "प्यार दीवाना होता है अफसाना होता है" यह धुन सुन के मैं उसकी तरफ देखने लगा वह भी थोड़ी शर्मा के मेरी तरफ देखने लगी। कुछ देर में बारिश रुक गई थी। सब लोग बाहर की तरफ अब धीरे धीरे जाने लगे थे। वह लड़की भी जा रही थी पता नहीं क्यों मैं खड़े होकर उसे वह से जाते हुए देखने लगा उसे अपने गाड़ी के पास जाकर बैठने से पहले एक बार काश वो मेरी तरफ देखती, फिर आगे सोचते कि क्या करना है।


वह लड़की गाड़ी के पास पहुंचकर रुक गई तभी हवा की तेज धार मेरे कानों में कुछ कहने लगी शायद वह उस लड़की के बारे में ही हो। जैसे लड़की पीछे मुड़ के देखती है लड़का अपनी आंखें बंद कर लेता, लड़की कुछ ठीक से देख नहीं पाती, लड़का आंखें खोलता है तब तक लड़की वहां से जा चुकी होती। कहां पता नहीं?


अगले दिन मैं पंजिम गया हुआ था मुझे कुछ काम था वह मार्केट से कुछ सामान मुझे लेना था, सामान लेने में दुकान के अंदर गया मैंने अपने लिए एक शर्ट देखा फिर मैं शर्ट ट्रायल करने ट्रायल रूम में गया अंदर से शर्ट बदल कर बाहर आया अपने आपको फिर से आईने में देखा हीरो लग रहा था। तभी दूसरे ट्रायल रूम से वह लड़की निकल रही थी मैं उसे देखने लगा कुछ देर बाद उसने भी मुझे देखा अपनी मम्मी के साथ थी और मैं अपनी तन्हाई के साथ बहुत तगड़ा वाला। फिर एक सेल्समैन आकर मुझे कहता सर शर्ट पैक कर दू आप अच्छे दिख रहे है। मैं थोड़ी देर वहीं खड़ा उसकी तरफ देखता रहा। वह भी शायद देख रही थी मन की आंखों से ऐसा मुझे लगा।


फिर वह लड़की उसकी मम्मी के साथ वहां से जाने लगी फिर उसने पीछे मुड़ा और मुझे एक इशारा किया उंगलियों से शायद कह रही थी कि इस शर्ट पर तुम बहुत अच्छे लग रहे हो और मैं उसकी तरफ देख अपना सर हिला रहा था।


 कुछ दिन बाद हर साल की तरह इस साल भी हमारे घर में काली पूजा का आयोजन किया जा रहा था हर साल हम इसे धूमधाम से मनाते हैं। शायद मैंने आप लोगों को अपना नाम नहीं बताया तो मेरा नाम है, राहुल नाम कहीं ना कहीं तो सुना ही होगा। तो पूजा का दिन था घर में सब व्यस्त थे मैं भी व्यस्थ था। शाम को पंडित जी आए उन्होंने मंदिर के पास सारी सामग्री चेक कर रहे थे और फिर सभी घरवालों को मंदिर के पास आने को कहा। अभी पूजा स्टार्ट होने वाली थी।


सब मंदिर के सामने खड़े थे पंडित जी और मेरे दादाजी काली मां को तिलक लगा कर फूलों की माला फिर प्रसाद चड़ाकर अब यज्ञ होने वाला था सब यज्ञ लिए यज्ञ कुंड के सामने बैठ गए पंडित जी ने अग्निकुंड में घी डालते जा रहे थे और मंत्र पढ़े जा रहे थे और हम हर मंतर पर एक फूल कुछ चावल के दाने अग्नि कुंड में डाल रहे थे। अब पूजा का सबसे लास्ट मंत्र पढ़ा जा रहा था। इसके बाद हम सब फ्री हो सकते हैं। सबने खूब मजा किया और ढोल नगाड़े बजे बहुत अच्छा लग रहा था साल में एक ही बार तो ऐसा अवसर आता है जब सारे घर वाले एक साथ होते हैं और साथ में शामिल होने के लिए कुछ प्रिय जन भी आते हैं।


तभी कुछ लोग घर के सामने गाड़ी से उतर रहे थे कुछ दूर के मेहमान थे शायद 5 लोग उतरे और फिर दूसरी तरफ से कार का गेट खुला और छठवां भी निकल गया जब मैंने उसको देखा यह तो वही लड़की थी जिसको मैंने उस दिन बीच पर देखा था और उस शॉपिंग कंपलेक्स पे। कुछ गजब से पॉजिटिव एनर्जी का एहसास हो रहा था। मेरे पापा मुझको उन सभी का सामान लेकर कमरे में ले जाने को कहते हैं और उस लड़की को साथ ले जाने को भी कहते हैं। लड़की और लड़के दोनों एक दूसरे की मदद करते हुए सामान कमरे तक ले जाते हैं और उसी बीच मैंने शालीनता से बिना उसकी तरफ देखे उसका नाम पूछना चाहा ही था कि कहीं से उसकी मम्मी चिल्ला रही थी- "चीकू चीकू कहां है तू इधर आ देख मस्त पकौड़े तले गए हैं गरमा गरम है"।


मैंने नाम सुना हंसी तो आई अपने आप को रोक लिया फिर लड़की ने मेरी तरफ देखा और कहां- "मुझे चार्जिंग करना चार्जिंग पॉइंट कहां है" तो फिर मैंने कहा यह तो गेस्ट हाउस है यहां तो सिर्फ एक ही चार्जिंग पॉइंट है दूसरा तो होगा नहीं तो फिर मैंने उसे अपने कमरे पर ले गया। चीकू अंदर आई उसने मेरा कमरा देखा उसने मेरे दीवार पर लगे पोस्टर पर भी गौर फ़रमाया। एक दीवार पर जॉन सीना का पोस्टर था और दूसरे में शाहिद कपूर का मैं इन दोनों का तगड़ा फैन था, और फिर उसने बिस्तर पर बिखरे मेरी किताबों को देखा। उसने कुछ पोएट्री की किताबें देखनी चाहि । चीकू उधर किताब देख रही थी और मैं उसे और मुझे मेरी बहन ने देख लिया।


चीकू बोलती है, तुम यह सब भी पढ़ते हो, "अमेजिंग सीक्रेट ऑफ आवर लाइफ" चीकू को भी अच्छा लगता था ऐसी किताबें पढ़ना, शायद वह थोड़ी-थोड़ी इंप्रेस हो रही थी, लेकीन मुझ से नहीं किताबों से, कहीं ना कहीं सोच भी बहुत मिलता जुलता ही था हम दोनों का, फिर हममें थोड़ी दोस्ती भी हो गई और जब भी मिलते तो कभी कभी कई फिलोसॉफिकल टॉपिक पर हम चर्चा भी किया करते आज मुझको बहुत अच्छा लग रहा था कल ने बोरियत कर दिया। क्योंकि हम इसके आगे बड़े ही नहीं रहे थे। मैंने फैसला किया अब तो मुझे इस बात को उसको बोलना है- "मुझे तुमसे प्यार हो गया है" अब बस इतना ही नहीं, मैं उसके घर गया, मैंने उससे बात करनी चाहि मैं उसको अकेले में मेरी दिल की बात कहने ही वाला था की उसके घर के सामने कोई गाड़ी आकर रुकी। चीकू की मम्मी जाकर देखने गई। गाड़ी से उनके कुछ दूर के रिश्तेदार आए थे और वह भी लखनऊ से वैसे बड़े नवाब फैमिली से लग रहे थे। मगर मुझे क्या करना मैं तो अपना काम करने आया था।


मैं ऐसा इसलिए कह रहा था कि मुझे पता चल चुका था की रस्सी पर बल देने से वैसे भी टूटेगी और हम भी गिरेंगे। इससे अच्छा है यह थोड़ी देर के लिए खामोश हो जाएं और आपके सामने क्या हो रहा है उसको समझे तभी कुछ हो सकता है जिंदगी तो मैं वहां खड़े होकर समझ रहा था कि अभी क्या हो रहा है और क्या होने वाला है चीकू मेरे पास खड़ी थी मुझे उसका चेहरा दिखाई नहीं दिया क्योंकि उसका पेट दिख रहा था लेकिन दिखने में तो ठीक दिख रहा था चश्मे लगाए हुए थे उससे जलन तो होगी मुझे और होनी भी चाहिए और हुई थी मुझे।


वह लड़का का नाम देव था, देव नाम मैंने भी सुना था कहीं कुछ साल पहले खैर छोड़ो आगे की ओर फोकस करते हैं देव के पापा, चीकू की मम्मी से और पापा से भी कुछ कह रहे थे कि जल्दी हो जाना चाहिए क्योंकि वक्त का कोई भरोसा नहीं है, उनको लखनउ से आए लोग इतना इमोशनल किए जा रहे थे कि अपनी बेटी के पापा तो अपनी पत्नी को भी दे दे। फिर चीकू के पापा ने कहा चिंता मत कीजिए आप जैसा चाहेंगे वैसा ही होगा। चीकू मुस्कुरा तो रही थी मगर क्यों मुस्कुरा रही थी, उसे नहीं मुस्कुराना नहीं था। मुझे अंदर ही अंदर बहुत अजीब फील हो रहा था चीकू कि शादी की बात सुनकर, मै बहुत ज्यादा उदास हो चुका था।

चीकू के आंखों में कुछ चला गया था शायद उसने दुपट्टे के पल्लू से अपनी आंखों को साफ करने लगी। फिर सब अंदर आए मिठाई खिलाने लगे अब संबंधी जो बनने वाले थे। आप लोग को लग रहा होगा कि मुझे कुछ समझ में आ रहा है कि नहीं, अरे क्यों नहीं आएगा इतना साफ साफ दिखाई तो दे रहा था।  चीकू के पापा जोर जोर से चिल्लाते हुए बोल पड़े दामाद जी को लड्डू खिलाओ दामाजी के लड्डू खिलाओ। तो क्या मुझे पता नहीं चलेगा चीकू के पापा उसे अपना दामाद बनाना चाहते हैं और मैं यहां बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवाना बना रहा था। अरे मारो मुझको मार दो क्या करूं जी के क्रेडिट कार्ड में क्रेडिट नहीं है कोई मेरा यह प्रीत भी नहीं है। मुझे क्या पता था अपनी किस्मत लखनऊ से आया हुआ वह लौंडा ले जाएगा।


अब सब एक दूसरे को लड्डू खिला चुके थे मैं उन्हें दूर से देख रहा था करीबन 4 मीटर की दूरी से उतना मेरे लिए एक युग के बराबर था। चीकू के पापा आए एक लड्डू मेरे मुंह में भी ठूंस दिए और मुझे कहने लगे बधाई हो, आज बेटी की शादी तय हुई हैं। मैं मन ही मन सोच रहा था मैं क्यों बधाई मनाऊ मेरी बेटी की शादी थोड़ी फिक्स हुई हैं। लेकिन मन की बात बाहर आ ही चुकी थी की चीकू ने मुझे रोक लिया और कहा चलो हमें एक बुक स्टॉल पर जाना है, कह के हम दोनों वहां से निकल गए मैं स्कूटी चला रहा था वह मेरे पीछे बैठी थी धीरे-धीरे वह मेरे और करीब आ रही थी जिंदगी में नहीं स्कूटी के पीछे सीट में पानी जम गया था तो ओ मेरे पास फिसल के आ रही थी। 


फिर हम एक अकेले शांत भरी जगह के पास जाकर मैंने उसकी तरफ देखा उसने अपनी आंखें झुका दी थी, मेरी आंखों की एक कशिश देखकर मैं समझ चुका था कि उसके दिल में भी कुछ है तभी तो मुझे वहां से यहां ले आई। चीकू ने सॉरी कहा और उसने कहा कि उसे पता नहीं था वे लोग लखनऊ से आने वाले हैं। चीकू ने कहा तुमको अजीब लग रहा था। इसलिए मैंने तुमको यहां ले आई, मैंने भी थोड़ा ताओ  से और गुस्से में पूछा आज मुझे बहुत बुरा लगा मेरे दिल को ठेस पहुंची।


लेकिन लेकिन यह क्या उसको पता ही नहीं कि मैं गुस्सा क्यों और बुरा क्यों लग रहा है और उसे यह भी नहीं पता। कि मैं उससे प्यार करता हूं और मुझे आज सच में अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था। चीकू ने कहा उसकी शादी तय हो रही हैं। वैसे उसने कहां- "तुम मेरे बहुत अच्छे दोस्त हो तुमने मेरी बहुत मदद की हमने साथ वक्त बहुत अच्छा बिताया" ऐसा कहकर चीकू  वहां से चली गई, अब यह क्या मदद उसने अच्छा वक्त मेरे साथ बिताया और जा किसी और के साथ रही हथी ऐसा हरगिज़ नहीं हो सकता मैं कृष्ण जी की अनुमति से सौगंध खाता की मैं उसको यकीन दिलाऊंगा कि मैं उससे कितना प्यार करता हूं। 


दो-तीन दिन से ना राहुल ने चीकू से बात किया और ना चीकू ने राहुल से फिर भी दोनों के बीच कुछ कनेक्शन तो था। राहुल मिलना नहीं चाह रहा था और चीकू मिल नहीं पा रही थी, वे सब इंगेजमेंट के लिए मडगांव जा रहे थे। देव के साथ में मैं बैठी थी और देव ने मुझे कुछ दिखाया एक अंगूठी था और एक हॉलीडे टिकट प्लान था मलेशिया का, चीकू को समझ नहीं आ रहा था कि उसने इस शादी के लिए हां कह दिया। अब उसे समझ में आ रहा था की अंगूठी की रिंग और मलेशिया की ट्रिप उसके जज्बातों को नहीं बदल सकती। क्योंकि इतने दिन हो गए हैं कभी उसने देव से ढंग से बात ही नहीं की और ना ही वह उसके बारे में जानती है क्योंकि चीकू तो राहुल के बारे में जानती है राहुल से बातें करती है राहुल की दोस्त है में ही मन चीकू ने कहां- "दोस्त है ना हम या नहीं" ऐसा सोचते सोचते रात हो गई सब वहां गेस्ट हाउस में पहुंच गए, फिर सब अपने अपने कमरे में सोने चले गए।



आधी रात को 1:00 बजे मडगांव में सेकंड फ्लोर पर बालकनी के ऊपर नीचे पाइप से चड़के मुंह में मोबाइल का टॉर्च रखें ऊपर चढ़ रहा था। राहुल बालकनी में पहुंच चुका था अंदर चीकू सो रही थी, मेरे मुंह से मोबाइल छोटा नीचे जमीन पर गिरा। चीकू चिल्लाई गेस्ट हाउस का मैनेजर वहां आकर देखने लगा, राहुल ने कहा कि मैं हूं मुझे अंदर आने दो मुझे तुमसे कुछ बातें करनी है, चीकू बालकनी का दरवाजा खोलती है उसको अंदर बुलाती है बाहर मैनेजर पूछता है- "कोई परेशानी तो नहीं", चीकू ने जवाब दिया- "नहीं ऐसे ही प्यास लगी थी"।


चीकू राहुल को गुस्से से डाट लगती है और उसके इन हरकतों पर राहुल को बहुत सुनाती है चीकू ने कहां- "आपको यहां आना नहीं चाहिए था, कोई देख लेता तो अभी मेरी शादी होने वाली है घरवाले क्या सोचते" और पहली बार ना जाने क्यों चीकू ने मुझसे आप करके बात की, फिर राहुल ने कहां- "यह तुमने मुझे आप से संबोधन करना कब से शुरू कर दिया, तुम तो मुझे तुम कहकर ही पुकारती थी कि तुम कहने से दोस्ती बरकरार रहती है, तुम को हो क्या गया बताओ मुझे" गुस्से से मैंने पूछा, अचानक कमरे कि लाइट चली गई फिर चीकू ने धीमी आवाज में बड़े ही प्यार से कुछ कहां- "तुम कहने से सिर्फ दोस्ती बरकरार रहती है और आप कहने से जिंदगी बन जाती है यह तुम नहीं समझोगे"। 


राहुल कहता है- "अगर मैं नहीं समझता तो यहां आता नहीं आया हूं तो तुमसे सच सुन कर जाऊंगा, तभी कोई कमरा नॉक करता है, क्योंकि मम्मी बाहर से चिल्लाती है- "सब ठीक है ना बेटा कोई दिक्कत तो नहीं है आइसक्रीम खाना है तो आजा, वेनेला वाला भी है, और चॉकलेट भी है"। राहुल मन ही मन सोच रहा कि ये कैसे जीव है इनको आधी रात को आइसक्रीम खानी है यह क्या नशा। अब चीकू ने मुझे जाने को कहा था, अब जाने को सच में कहा था। मतलब गुस्से में कहा था उसने अपने पैर से मेरे पैर को रोंग दिया था मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था फिर मैं जाने लगा तो नीचे फर्श से फिसल के मैं उसके ऊपर गिरा। मैंने उसके बाल को उसकी आंखों से हटाया। और उसे कहने लगा- "देव जितनी भी कोशिश कर ले मुझसे मेरी चीकू को छीनने की नहीं सकता कहता है" यह कहकर राहुल वहां से चला जाता है। 


चीकू बालकनी में खड़े होकर राहुल को रास्ते पर जाते हुए देख रही होती है शायद यह हमारी प्यार की जीत की पहली निशानी हो सकती है, मुझे भी तुमसे प्यार है चीकू को भी लगता था लेकिन कह नहीं पाई, कुछ कदम हम इश्क के चल नहीं पाते, कुछ रिश्तो को हम बदनाम नहीं कर पाते क्योंकि कभी-कभी जिंदगी के कुछ फैसले दूसरों के हक से भी लेना चाहिए नहीं तो रिश्ते बदनाम होने में देर नहीं लगती, ऐसा चीकू सोचने लगी क्योंकि राधा ने भी कृष्ण से प्यार किया था पर रिश्तो को बदनाम नहीं होने दिया, राधा ने किसी और से शादी कर ली और कृष्ण वृंदावन छोड़कर चलें गए, कुछ त्याग हमारे जिंदगी में बदलाव लाते हैं और नई सीख के साथ हम अपनी जिंदगी की शुरुआत करते हैं। क्या पता हमारी जिंदगी में कहीं ऐसा मोड़ ना आ जाए, कि रिश्तो और प्यार में रिश्ते निभाने ना पड़ जाए।

 बस इतनी सी थी यह कहानी!



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